अजय कुमार लल्लू को प्रियंका गांधी ने दी कांग्रेस की कमान


धाकड़ खबर | 08 Oct 2019


न्यूज डेस्क। कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाम की घोषणा भी कर दी है. प्रदेश संभालने का काम अब अजय कुमार लल्लू को मिला है. उन्हें कांग्रेस ने यूपी का अध्यक्ष बनाया है. अजय कुमार लल्लू कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई कमेटी पिछली कमेटी की अपेक्षा दस गुना छोटी है. पिछली कांग्रेस कमेटी लगभग 500 सदस्यों की थी, लेकिन नई कमेटी लगभग 40 से 45 सदस्यों की है. नई कमेटी के हर पदाधिकारी की खास जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई है. ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस एक बार फिर से राज्य में पांव पसारने के लिए तैयार हो गई है. जिस तरह उत्तर प्रदेश की हर घटानाओं पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इन दिनों सक्रिय हैं, लग रहा है कि कांग्रेस को संजीवनी मिल गई है. अजय कुमार लल्लू कांग्रेस के पूर्वी यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. वे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेहद करीबी माने जाते हैं. वे प्रियंका गांधी के हर यूपी दौरे में साथ नजर आते हैं. अजय कुमार लल्लू बने यूपी कांग्रेस के अध्यक्षप्रियंका गांधी के बेहद करीबी नेतासामाजिक न्याय के मुद्दे पर रहे हैं मुखर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस एक बार फिर से अपने उखड़े पांव जमाने की कोशिश कर रही है.
इसलिए ही प्रियंका गांधी अपनी टीम तैयार कर रही हैं, जिसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी नजर आ रही है. प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू खुद 40 साल के हैं और उनकी टीम के सदस्य भी ज्यादातर 40 से 45 साल की उम्र के ही हैं. ऐसे में देखना होगा कि कांग्रेस की युवा टीम क्या पार्टी का खोया हुआ जनाधार वापस दिला पाएगी. पहला अजय कुमार लल्लू पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं और दूसरा वह पिछड़ी कही जाने वाली कानू जाति से ताल्लुक रखते हैं. वह सामाजिक न्याय के मुद्दे पर मुखर भी हैं और यूपी में हर मसले को उठाने को लेकर तत्पर रहते हैं. इसीलिए अजय कुमार लल्लू को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है. अजय कुमार लल्लू को प्रदेश की कमान सौंपकर कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साध रही है. अजय कुमार लल्लू को लेकर एक वाकया अक्सर सुनाया जाता है. साल 2007 में कुशीनगर के आजादनगर कस्बे में एक नौजवान निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाषण दे रहा था. एक जोशीला भाषण. तभी पीछे से एक बुजुर्ग की आवाज आई, श्ई बार त ना, पर अगली बार बेटा विधायक बनबे.श् मतलब इस बार तो नहीं लेकिन अगली बार जरूर विधायक बनोगे.
जब चुनाव का नतीजा आया तो नौजवान निर्दलीय उम्मीदवार कुछ हजार वोटों पर सिमट गया. हारा हुआ नौजवान कोई और नहीं, अजय कुमार लल्लू थे. एक स्थानीय कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष. अजय कुमार लल्लू की खासियत यह रही कि हमेशा से जमीनी आंदोलनों में बेहद सक्रिय रहे हैं.लिहाजा इन्हीं संघर्षों के चलते उन्हें हर मुद्दे पर पुलिसिया सख्ती का सामना करना पड़ा. हर बार उन पर लाठियां बरसीं. संघर्ष के प्रति अजय कुमार शुरुआती दिनों में इतने प्रतिबद्ध रहे कि लोग उन्हें श्धरना कुमारश् कहने लगे.
चुनाव हारने के बाद आजीविका चलाने के लिए अजय कुमार लल्लू बतौर मजदूर दिल्ली आए. उनकी इसी सफलता को देखते हुए उन्हें विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता भी चुन गया.अजय कुमार लल्लू खुद कानू जाति से आते हैं. उत्तर प्रदेश की कमेटी भी सामाजिक संतुलन और समावेशी जातीय समीकरणों के आधार पर तैयार हुई है. संघर्ष के दिनों में उन्होंने दिहाड़ी मजदूर के तर्ज पर काम किया. मजदूरी के दौरान भी न तो उनसे क्षेत्र छूटा, न क्षेत्रीय लोग. फोन पर ही लोगों के साथ उनका संबंध बना रहा. अजय कुमार लल्लू फिर से कुशीनगर लौट आए. लल्लू फिर से कुशीनगर की सड़कों पर संघर्ष करने लगे.

मुसहरों की बस्तियों में उनको एकजुट करने लगे. नदियों के कटान को लेकर धरने पर बैठने लगे. गन्ना किसानों के लिए मीलों के घेराव के आन्दोलन के पहली कतार में हमेशा खड़े नजर आए. एक बुजुर्ग की पांच साल पुरानी भविष्यवाणी सच साबित हुई और एक मजदूर, एक संघर्ष करने वाला नौजवान तमकुहीराज विधानसभा से विधायक चुना गया. अजय, साल 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे तब उन्होंने भाजपा के नंद किशोर मिश्रा को 5860 वोटों से हराया था, लेकिन दिनों दिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती रही. विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने भी अजय कुमार लल्लू पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दे दिया. 2017 के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड लहर में भी तमकुहीराज की जनता ने फिर से अपने धरना कुमार को चुना. 2017 के बीजेपी लहर में भी उन्होंने न सिर्फ अपनी सीट बचाये रखी बल्कि 2012 से ज्यादा बड़े अंतर से उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी को हराया. साल 2017 में अजय ने भाजपा के जगदीश मिश्रा को 18 हजार 114 वोटों से मात दी. 



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