पीएमसी बैंक घोटालाः 21049 फर्जी खाते


धाकड़ खबर | 06 Oct 2019

पीएमसी बैंक घोटालाः 21049 फर्जी खाते

मुुंबई। ज्यादातर मरे हुए लोगों के नाम पर खाते हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पीएमसी बैंक स्कैम की जांच में पाया कि बैंक में खोले गए अधिकतम खाते फर्जी थे. सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई को मार्च 2018 में जिन लोन अकाउंट्स की डिटेल्स दी गई उनमें से अधिकतम या तो मृतकों के नाम पर थे या फिर उनके नाम पर थे जो अपने खाते बंद कर चुके थे.  
45 दिनों के अंदर ही इन खातों को क्रिएट कर, डिटेल्स आरबीआई को सौंप दी गई थी. खातों में दी गई रकम की जानकारी भ्क्प्स् और उसकी ग्रुप कंपनियों के दिए गए लोन से काफी कम थी. ये 21049 खाते कोर बैंकिंग सिस्टम में नहीं बनाए गए थे बल्कि इन्हें एडवांस मास्टर इंटेंड एंट्री के रूप में आरबीआई के सामने पेश किया गया था. जांच में 21049 खाते फर्जी पाए गए ताकि पीएमसी को दिए गए लोन को छिपाया जा सके. अधिकतम अकाउंट मृतकों के नाम पर खोले गए. 
आरबीआई ने अपनी शुरुआती जांच में पीएमसी के 44 में से सिर्फ 10 खातों को सही पाया. आरबीआई बाकी बचे खाता धारकों की पहचान में लगा है. सूत्रों के मुताबिक, स्कैम का बैंक के रिजर्व पर काफी बुरा असर पड़ा है. फंड्स की कमी 3000 करोड़ से ज्यादा की हो सकती है. आरबीआई का मूल्यांकन पूरा होने तक इसके और बढ़ने का अनुमान है.
पीएमसी बैंक पर नॉन परफॉर्मिंग एसेट और लोन वितरण के बारे में आरबीआई को गलत जानकारी देने का आरोप है. इस मामले में बैंक के चेयरमैन एस वरयाम सिंह को मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा ने शनिवार को हिरासत में ले लिया. वहीं बैंक के निलंबित प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को मुंबई की एक अदालत ने 12 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. जॉय थॉमस ने बताया था कि बैंक द्वारा दिए गए लोन का करीब 73 फीसदी हिस्सा सिर्फ एक कंपनी हाउिसंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिया गया. घोटाला सामने आने पर आरबीआई ने बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं. आरबीआई ने यह कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्शन 35ए के तहत की. बैंक में कोई नया फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट नहीं खुल सकेगा. इसके अलावा बैंक के नए लोन जारी करने पर भी पाबंदी लगाई गई थी.



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