श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर देते हैं ऐसा आशीर्वाद


धाकड़ खबर | 19 Sep 2019


श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होकर देते हैं ऐसा आशीर्वाद

न्यूज डेस्क। पितृों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करने और उनका आशीर्वाद लेने का सबसे बेहतर समय पितृपक्ष होता है। इन दिनों पितृ अपने परिजनों से तृप्त होने की आशा करते हैं और उनके परिजन भी भक्तिभाव से उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इन दिनों पितृों के निमित्त कर्मकांड करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने परिजनों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। श्रद्धा और विधि.विधान से श्राद्ध करने से पितृ स्वयं पधारते हैं। कहा जाता है कि श्राद्ध में आमंत्रित किए गए ब्राह्मण पितृों के प्रतिनिधि रूप होते हैं। इस बात की पुष्टि राम.सीता की एक कथा से होती है। एक बार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पुष्कर तीर्थ में अपने पिता दशरथ का श्राद्ध कर रहे थे। जब श्रीराम ब्राह्मणों को व्यंजन परोस रहे थेए उस वक्त सीताजी एक वृक्ष के पीछे चली गई। जब श्रीराम ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने श्रीराम से कहा कि आपने जब नाम.गोत्र को बोलकर अपने पिता.दादा आदि पूर्वजों का आवाहन किया तो वे यहां ब्राह्मणों के शरीर में छाया रूप में उपस्थित थे। इसलिए में मर्यादा का पालन करते हुए अपने पितृों के समक्ष नहीं आई और पेड़ के पीछे चली गई। यमस्मृति में कहा गया है कि पितृों का श्राद्ध करने से आयुए पुत्रए यशए कीर्तिए बलए बुद्धिए पशुए धनए सुख आदि की प्राप्ति होती है। यमदेव ने कहा है कि पितृों के निमित्त श्राद्ध करने से 6 महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं।

पितृकर्म करने से मनुष्य की आयु में वृद्धि होती है। घर, परिवार में सुख.समृद्धि का वास होता है।

मनुष्य के बल. पौरुष में वृद्धि होने के साथ यश कीर्ति बढ़ती है, उत्तम स्वास्थ्य के साथ धन.धान्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख.शांति का माहौल रहता है और प्रेमभाव बना रहता है। श्राद्धकर्म से घर.परिवार के कई तरह के दोषों का नाश होता है।



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