राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉन बोल्टन को किया बर्खास्त 


धाकड़ खबर | 11 Sep 2019

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉन बोल्टन को किया बर्खास्त 

नई दिल्ली। जॉन बोल्टन की आक्रामक नीति से परेशान थे ट्रंपईरान-नॉर्थ कोरिया के मसले पर दोनों नेताओं में ठनी थी जॉन बोल्टन की गिनती अमेरिका के उन नौकरशाहों में होती है, जो अपनी नीति को लागू करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. ईरान से तल्ख रिश्ते, चीन के साथ ट्रेड वॉर समेत दुनिया में कई बड़ी समस्याओं में उलझे अमेरिका में मंगलवार को बड़ी राजनीतिक उठापटक हुई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को बर्खास्त कर दिया और जल्द ही नए छै। के ऐलान की बात कही. जॉन बोल्टन की गिनती अमेरिका के उन नौकरशाहों में होती है, जो अपनी नीति को लागू करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. फिर चाहे बात युद्ध की ही क्यों ना हो. ईरान, नॉर्थ कोरिया, अफगानिस्तान में अमेरिका का सख्त रुख उनकी ही देन है और इन्हीं के चलते उनके और डोनाल्ड ट्रंप के बीच विवाद हुआ और अंततरू उन्हें पद छोड़ना पड़ा. जॉन बोल्टन 15 साल की उम्र से ही रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक रहे हैं और रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बैरी गोल्डवाटर (1964) के लिए बोल्टन ने स्कूल में प्रचार किया था. उसके बाद से ही वह लगातार इस पार्टी के लिए काम करते रहे और पिछले 2-3 दशकों से नीतिगत फैसलों का हिस्सा रहे.


उनकी नीति हमेशा आक्रामक रही, जो किसी भी देश से युद्ध के लिए तैयार, कई देशों में सत्ता परिवर्तन के पक्षधर रहे हैं. जॉन बोल्टन की आक्रामक नीति से जुड़े कुछ पहलुओं पर यहां नजर डालें। 
- 1998 में जॉन बोल्टन अमेरिका की एजेंसी न्यू अमेरिकन सेंचुरी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे हैं, जिन्होंने ईरान के साथ युद्ध का समर्थन किया था.
- नॉर्थ कोरिया के साथ बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने दोस्ती के कदम उठाए थे, लेकिन जॉन बोल्टन की नीति अलग है. बोल्टन का मानना रहा है कि अमेरिका को बिना देरी किए नॉर्थ कोरिया पर स्ट्राइक करनी चाहिए, नहीं तो वह खतरा बन सकता है.
- बीते दिनों जब ट्रंप-किम जोंग उन की मुलाकात रद्द हुई तो उसके पीछे जॉन बोल्टन की नीति ही थी. क्योंकि जॉन बोल्टन ने नॉर्थ कोरिया के सामने कई कठिन शर्तें रख दी थीं.
- ईरान और अमेरिका के बीच इस वक्त परमाणु डील को लेकर तल्खी चल रही है. जॉन बोल्टन की ईरान को लेकर एक ही नीति है अगर वह ना माने तो बम बरसा देने चाहिए. बोल्टन की इसी नीति की वजह से डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को हटा दिया था.



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