पाबंदियां जरूरी, आम लोगों को मिलेगी राहत


धाकड़ खबर | 19 Aug 2019

पाबंदियां जरूरी, आम लोगों को मिलेगी राहत

आखिरकार कोर्ट को यह कहना पड़ा कि याचिकाकर्ता को जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं, तो फिर यह अपने आप साफ है कि प्रतिबंध हटाए जाने की मांग कितनी अतार्किक है। सुप्रीम कोर्ट ने यह बिल्कुल सही कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के लिए केंद्र सरकार को वक्त मिलना चाहिए, क्योंकि इस राज्य के हालात संवेदनशील हैं। लंबे समय से आतंकवाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर में ऐसे तत्वों को कोई मौका नहीं दिया जा सकता, जो भारत को हजार घाव देने के मंसूबे पाले हुए हैं और किसी भी समय कोई बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी और याचिकाकर्ता को लगाई गई फटकार से उन लोगों को जवाब मिल जाना चाहिए जो अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद हालात नियंत्रण में रखने के लिए लगाई गई तमाम पाबंदियों को गलत ठहरा रहे हैं। बेहतर होगा कि इन पाबंदियों से असुविधा महसूस कर रहे लोग यह समझें कि ये खुद उनकी और जम्मू-कश्मीर के अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए हैं। बेहतर होगा कि जम्मू-कश्मीर की जनता सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के इस संकल्प पर गौर करे जिसमें उन्होंने कहा है कि सेना स्थानीय लोगों के साथ वैसे ही मिलकर रहेगी, जैसे वह 30-40 साल पहले रहती थी। केंद्र सरकार का फैसला जम्मू-कश्मीर को एक नए युग में ले जाने के लिए कड़वी औषधि की तरह है। इसका असर होने में वक्त भी लगेगा और कुछ तकलीफें भी होंगी। इन तकलीफों को सहने के लिए हर किसी को तैयार रहना चाहिए। अब जब जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से यह बताया गया है कि हालात की समीक्षा करते हुए पाबंदियों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जा रही है, तब उचित यही है कि सरकार को अपना काम करने दिया जाए। वैसे भी यह कोई पहला अवसर नहीं, जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर आम जनता के आवागमन और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर पाबंदियां लगाई गई हों। कश्मीर के मामले में तो यह और अधिक आवश्यक है कि सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। अनुच्छेद 370 पर सरकार के ऐतिहासिक फैसले के संदर्भ में सुरक्षा को चाक-चैबंद रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनका उद्देश्य ऐसे ही तत्वों के मंसूबों को नाकाम करना है। रावत के इस कथन का संदेश साफ है कि आतंकवाद के कारण सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सेना और आम जनता के बीच यदि कोई दूरी बन भी गई थी, तो वह अब समाप्त होने वाली है। सच तो यही है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों को एक झटके में वापस नहीं लिया जा सकता।


 



अन्य ख़बरें

Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry