झारखंड: बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से खाये!


धाकड़ खबर | 23 Dec 2019

 

न्यूज डेस्क। तीसरा राज्य बना झारखंड, जहां बीजेपी ने जीतीं सबसे ज्यादा सीटें, लेकिन हाथ से फिसली सत्ता। झारखंड में बीजेपी ने बिना गठबंधन के विधानसभा चुनाव लड़ा था. एक कहावत बड़ा मशहूर है कि बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहां से खाये। केवल भाषण देने से नहीं चलता, कुछ करके दिखाना पड़ता है। झारखंड विधानसभा चुनाव के रुझानों से साफ हो गया है कि इस राज्य की सत्ता भी बीजेपी के हाथ से फिसल गई है. अब तक आए रुझानों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है, लेकिन सरकार महागठबंधन की बनती दिख रही है. पिछले चुनावों पर नजर डालें तो ये तीसरा मौका है, जहां सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीजेपी के हाथ से सरकार बनाने का मौका निकल गया. हम आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो ये तीसरा मौका है, जहां सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी बीजेपी के हाथ से सरकार बनाने का मौका निकल गया है. इससे पहले कर्नाटक, फिर महाराष्ट्र और अब झारखंड में सरकार दूसरा गठबंधन बनाएगा.
इससे पहले कर्नाटक, फिर महाराष्ट्र और अब झारखंड में दूसरा गठबंधन सरकार बनाएगा। सबसे पहले बात कर्नाटक विधानसभा चुनावों की. पिछले साल मई 2018 में हुए चुनावों के दौरान बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. 224 विधानसभा सीटों पर हुए चुनावों में बीजेपी को 104 सीटें मिलीं. वह सबसे बड़ी पार्टी बनी. कांग्रेस को 78 सीटें मिलीं. वहीं जेडीएस 37 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही. बीजेपी बहुमत हासिल नहीं कर पाई और कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली. कांग्रेस ने जेडीएस को सीएम पद गिफ्ट कर दिया. इसी साल महाराष्ट्र में हुए चुनावों में एक बार फिर से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन यहां शिवसेना ने सीएम पोस्ट पर पलटी मारते हुए बीजेपी को गच्चा दे दिया. महाराष्ट्र में 288 सीटों पर हुए चुनावों में बहुमत का आंकड़ा 145 का था. चुनाव बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर लड़ा. नतीजे आए तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसे 105 सीटों पर जीत मिली. शिवसेना को 56 सीटों पर जीत मिली. दोनों ने मिलकर 151 सीटों पर जीत हासिल की. गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन आखिर में आकर शिवसेना ने सीएम पद की मांग कर डाली और यहां भी सत्ता बीजेपी के हाथ से फिसल गई. शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली. एनसीपी कांग्रेस को 105 सीटें मिली थीं. वहीं दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस महागठबंधन सरकार बनाने के करीब पहुंच गया है. जेएमएम को 24, कांग्रेस 11 और आरजेडी को 5 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है. यहां कई सीटों पर बेहद करीबी मुकाबला देखा गया. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि अगर बीजेपी यहां अपने पुराने गठबंधन साधेदार आजसू को साथ रखकर चुनाव लड़ती तो नतीजे कुछ और होते.
दरअसल, पंडितों का मानना है झिारखंड में गठबंधन न करना ही बना बड़ी भूल। झारखंड में 81 सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी 30 सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही है. 41 सीटों के बहुमत वाली विधानसभा में वह 10 सीटों से पिछड़ती दिख रही है. 



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